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नदियाँ नरवा मा तउरत हे ग़ज़ल मुकुंद कौशल हिंदी कक्षा 9वीं पाठ 4.3

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मुकुंद कौशल

मुकुन्द कौशल का जन्म 7 नवम्बर सन्‌ 947 को दुर्ग नगर में हुआ। कौशल जी, हिंदी और उत्तीसगढ़ी के कुशल कवि एवं सुपरिचित गीतकार हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ी ग़ज़लों को एक नई पहचान दी। उनकी प्रमुख प्रकाशित रचनाएँ मिनसार (छतीसगढ़ी काव्य संग्रह), त्रालटेन जलने दो (हिंदी काव्य संग्रह), हमर भुइयोँ हमर अगास (त्तीसगढ़ी काव्य संग्रह) मोर ग़ज़ल के उड़त परेवा (छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल संग्रह), कैंरवस (छत्तीसगढ़ी उपन्यास) हैं।

नदियाँ नरवा मा तउरत हे ग़ज़ल मुकुंद कौशल

नॉंदिया-नरवा मा तँउरत है, मनखे के बिसवास इहाँ।
पथरा-पथरा मा लिक्खे है, भुइयाँ के इतिहास इहाँ।।

‘तीपत भॉभरा, बरसत पानी के हम्मन टकराहा हन,
लड़का मन संग खुड़वा खेलत रहिये बारामास इहाँ।

‘पूस-माघ मा जाड़ जनावै, अँगरा कस बड़साख तपै,
बडहा होके धमसा कूदै सावन मा चउमास इहाँ।

ये भुईयां के बात अलग है, काए बतावाँ गुन येकर,
बोहे रहियें नान्हे-नान्हे, लड़का मनन अगास इहाँ।

पीरा फीजे जिनगानी के, धुरघपटे अँधियारी मा,
हितवाई के दीया करथे, अंतस मा परकास इहोँ।

ये ममियारों राम-लखन के, बानासुर के राज इही,
राम लखन-सीता आइन हैं, पहुना बन के खास इहाँ।

हर चौंका ले कोन्टा तक मा, माढ़े हैं देवता धामी,
‘कौसल’ इहँचे गंगा मैया, अउ पाबे कैलास इहाँ।

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