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जीवन का झरना (कविता ) आरसी प्रसाद सिंह हिंदी कक्षा 10 वीं पाठ 6.1

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आरती प्रसाद सिंह : जीवन परिचय

प्रसिद्ध कवि, कथाकार और एकांकीकार आरसी प्रसाद सिंह को जीवन और यौवन का कवि कहा जाता है। इन्होंने हिन्दी साहित्य को बालकाव्य, कथाकाव्य, महाकाव्य, गीतकाव्य, रेडियो रूपक एवं कहानियों समेत कई रचनाएँ दी हैं। इनके प्रमुख कविता संग्रहों में आजकल, कलापी संचयिता आरसी जीवन और यौवन, मैं किस देश में हूँ: प्रेम गीत, खोटा सिक्का, आदि हैं। सहज प्रवाह और भाव के अनुरूप भाषा के कारण इनकी रचनाओं को पढ़ना हमेशा ही दिलचस्प रहता है।

जीवन का झरना (कविता ) आरसी प्रसाद सिंह

यह जीवन क्या है? निर्झर है, मस्ती ही इसका पानी है।
सुख-दुख के दोनों तीरों से चल रहा राह मनमानी है।

कब फूटा गिरि के अंतर से? किस अंचल से उतरा नीचे?
किस घाटी से बह कर आया समतल में अपने को खींचे?

निर्झर में गति है, जीवन है, वह आगे बढ़ता जाता है!
धुन एक सिर्फ़ है चलने की, अपनी मस्ती में गाता है।

बाधा के रोड़ों से लड़ता, वन के पेड़ों से टकराता,
बढ़ता चट्टानों पर चढ़ता, चलता यौवन से मदमाता।

लहरें उठती हैं, गिरती हैं; नाविक तट पर पछताता है।
तब यौवन बढ़ता है आगे, निर्झर बढ़ता ही जाता है।

निर्झर कहता है, बढ़े चलो! देखो मत पीछे मुड़ कर!
यौवन कहता है, बढ़े चलो! सोचो मत होगा क्या चल कर?

चलना है, केवल चलना है ! जीवन चलता ही रहता है !
रुक जाना है मर जाना ही, निर्झर यह झड़ कर कहता है !

सार संक्षेप

‘जीवन का झरना’ कविता कवि आरसी प्रसाद सिंह की प्रेरणादायी कविता है जिसमें उन्होंने जीवन की तुलना झरने से करते हुए निरंतर गतिशील रहने की प्रेरणा दी है।

झरने के रास्ते में अनेक बाधाएँ आती है परंतु वह बाधाओं को हटाकर अपना मार्ग ढूँढ लेता है और गंतव्य तक पहुँच जाता है। सुख और दुख हमारे जीवन रूपी झरने के दो किनारे हैं इसलिए दुखों के आगे आने पर हमें निराश नहीं होना चाहिए बल्कि आने वाली हर परिस्थिति का सहर्ष कर सामना करना चाहिए।जिस प्रकार झरना पत्थरों से टकराता है और आगे बढ़ता है उसी प्रकार हमें भी उनका सामना करके आगे बढ़ना चाहिए। 

इस प्रकार कवि ने हमें झरने के द्वारा गतिशील और प्रगतिशील रहने की प्रेरणा दी है।

पाठ से अभ्यास

  1. कवि ने जीवन की समानता, झरने से किन-किन रूपों में की है? अपने शब्दों में लिखिए।
  2. कविता में आई पंक्ति सुख-दुःख के दोना तीरों से कवि का क्या आशय है? मानव जीवन में इनका महत्व क्या है।
  3. संपूर्ण कविता में झरना’ मानव जीवन के विभिन्न भावबोधों से जुड़ता है, कैसे? अपने विचार प्रस्तुत कीजिए।
  4. बाधा के रोड़ों से लड़ता उक्त पंक्ति का आशय, जीवन को कैसे और कब-कब प्रभावित तथा प्रेरित करता है? अपने शब्दों में लिखिए।
  5. जीवन का झरना” कविता में मानव का मृत हो जाना क्यों और कब बताया गया है?
  6. कविता की उन पंक्तियों को लिखिए जो मानव मन को संघर्ष के लिए प्रेरित करती हैं?

पाठ से आगे अभ्यास

  1. उपर्युक्त कविता मन में आशा का संचार करती है और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। हमारे परिवेश की बहुत सी घटनाएँ हमारे मन में इसी प्रकार के भावों को जगाती हैं, उनका संकलन कर उन पर चर्चा कीजिए।

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