संधि की परिभाषा भेद व नियम

संधि की परिभाषा

दो वर्णों (स्वर या व्यंजन) के मेल से होने वाले विकार को संधि कहते हैं।

दूसरे अर्थ में- संधि का सामान्य अर्थ है मेल। इसमें दो अक्षर मिलने से तीसरे शब्द की रचना होती है, इसी को संधि कहते हैै।

सरल शब्दों में- दो शब्दों या शब्दांशों के मिलने से नया शब्द बनने पर उनके निकटवर्ती वर्णों में होने वाले परिवर्तन या विकार को संधि कहते हैं।

संधि का शाब्दिक अर्थ है- मेल या समझौता। जब दो वर्णों का मिलन अत्यन्त निकटता के कारण होता है तब उनमें कोई-न-कोई परिवर्तन होता है और वही परिवर्तन संधि के नाम से जाना जाता है।

संधि विच्छेद- उन पदों को मूल रूप में पृथक कर देना संधि विच्छेद हैै।
जैसे- हिम + आलय= हिमालय (यह संधि है), अत्यधिक= अति + अधिक (यह संधि विच्छेद है)

  • यथा + उचित= यथोचित
  • यशः + इच्छा= यशइच्छ
  • अखि + ईश्वर= अखिलेश्वर
  • आत्मा + उत्सर्ग= आत्मोत्सर्ग
  • महा + ऋषि= महर्षि
  • लोक + उक्ति= लोकोक्ति

संधि के भेद

वर्णों के आधार पर संधि के तीन भेद है-
(1)स्वर संधि (vowel sandhi)
(2)व्यंजन संधि (Combination of Consonants)
(3)विसर्ग संधि (Combination Of Visarga)

(1)स्वर संधि (vowel sandhi) :- दो स्वरों से उत्पत्र विकार अथवा रूप-परिवर्तन को स्वर संधि कहते है।

दूसरे शब्दों में- ”स्वर वर्ण के साथ स्वर वर्ण के मेल से जो विकार उत्पत्र होता है, उसे ‘स्वर संधि’ कहते हैं।”

जैसे- विद्या + अर्थी = विद्यार्थी, सूर्य + उदय = सूर्योदय, मुनि + इंद्र = मुनीन्द्र, कवि + ईश्वर = कवीश्वर,
महा + ईश = महेश

इनके पाँच भेद होते है –
(i)दीर्घ संधि
(ii)गुण संधि
(iii)वृद्धि संधि
(iv)यण संधि
(v)अयादी संधि

(i)दीर्घ संधि- जब दो सवर्ण, ह्रस्व या दीर्घ, स्वरों का मेल होता है तो वे दीर्घ सवर्ण स्वर बन जाते हैं। इसे दीर्घ स्वर-संधि कहते हैं।

नियम- दो सवर्ण स्वर मिलकर दीर्घ हो जाते है। यदि ‘अ”,’ ‘आ’, ‘इ’, ‘ई’, ‘उ’, ‘ऊ’ और ‘ऋ’के बाद वे ही ह्स्व या दीर्घ स्वर आये, तो दोनों मिलकर क्रमशः ‘आ’, ‘ई’, ‘ऊ’, ‘ऋ’ हो जाते है। जैसे-

अ + अ= आअत्र + अभाव= अत्राभाव
कोण + अर्क= कोणार्क
अ + आ= आशिव + आलय= शिवालय
भोजन + आलय= भोजनालय
आ + अ= आविद्या + अर्थी= विद्यार्थी
लज्जा + अभाव= लज्जाभाव
आ + आ= आविद्या + आलय= विद्यालय
महा + आशय= महाशय
इ + इ= ईगिरि + इन्द्र= गिरीन्द्र
इ + ई= ईगिरि + ईश= गिरीश
ई + इ= ईमही + इन्द्र= महीन्द्र
ई + ई= ईपृथ्वी + ईश= पृथ्वीश
उ + उ= ऊभानु + उदय= भानूदय
ऊ + उ= ऊस्वयम्भू + उदय= स्वयम्भूदय
ऋ + ऋ= ऋपितृ + ऋण= पितृण

(ii) गुण संधि- अ, आ के साथ इ, ई का मेल होने पर ‘ए’; उ, ऊ का मेल होने पर ‘ओ’; तथा ऋ का मेल होने पर ‘अर्’ हो जाने का नाम गुण संधि है।
जैसे-

अ + इ= एदेव + इन्द्र= देवन्द्र
अ + ई= एदेव + ईश= देवेश
आ + इ= एमहा + इन्द्र= महेन्द्र
अ + उ= ओचन्द्र + उदय= चन्द्रोदय
अ + ऊ= ओसमुद्र + ऊर्मि= समुद्रोर्मि
आ + उ= ओमहा + उत्स्व= महोत्स्व
आ + ऊ= ओगंगा + ऊर्मि= गंगोर्मि
अ + ऋ= अर्देव + ऋषि= देवर्षि
आ + ऋ= अर्महा + ऋषि= महर्षि

(iii) वृद्धि संधि- अ, आ का मेल ए, ऐ के साथ होने से ‘ऐ’ तथा ओ, औ के साथ होने से ‘औ’ में परिवर्तन को वृद्धि संधि कहते हैं।
जैसे-

अ + ए =ऐएक + एक =एकैक
अ + ऐ =ऐनव + ऐश्र्वर्य =नवैश्र्वर्य
आ + ए=ऐमहा + ऐश्र्वर्य=महैश्र्वर्य
सदा + एव =सदैव
अ + ओ =औपरम + ओजस्वी =परमौजस्वी
वन + ओषधि =वनौषधि
अ + औ =औपरम + औषध =परमौषध
आ + ओ =औमहा + ओजस्वी =महौजस्वी
आ + औ =औमहा + औषध =महौषध

(iv) यण संधि- इ, ई, उ, ऊ या ऋ का मेल यदि असमान स्वर से होता है तो इ, ई को ‘य’; उ, ऊ को ‘व’ और ऋ को ‘र’ हो जाता है। इसे यण संधि कहते हैं।
जैसे-

(क) इ + अ= ययदि + अपि= यद्यपि
इ + आ= याअति + आवश्यक= अत्यावश्यक
इ + उ= युअति + उत्तम= अत्युत्तम
इ + ऊ = यूअति + उष्म= अत्यूष्म
(ख) उ + अ= वअनु + आय= अन्वय
उ + आ= वामधु + आलय= मध्वालय
उ + ओ = वोगुरु + ओदन= गुवौंदन
उ + औ= वौगुरु + औदार्य= गुवौंदार्य
उ + इ= विअनु + इत= अन्वित
उ + ए= वेअनु + एषण= अन्वेषण
(ग) ऋ + आ= रापितृ + आदेश= पित्रादेश

(v) अयादि स्वर संधि- ए, ऐ तथा ओ, औ का मेल किसी अन्य स्वर के साथ होने से क्रमशः अय्, आय् तथा अव्, आव् होने को अयादि संधि कहते हैं।
जैसे-

ए + अ= यने + अन= नयन
ऐ + अ= यगै + अक= गायक
ओ + अ= वभो + अन= भवन
औ + उ= वुभौ + उक= भावुक

(2)व्यंजन संधि ( Combination of Consonants ) :- व्यंजन से स्वर अथवा व्यंजन के मेल से उत्पत्र विकार को व्यंजन संधि कहते है।
दूसरे शब्दों में- एक व्यंजन के दूसरे व्यंजन या स्वर से मेल को व्यंजन-संधि कहते हैं।

कुछ नियम इस प्रकार हैं-

(1) यदि ‘म्’ के बाद कोई व्यंजन वर्ण आये तो ‘म्’ का अनुस्वार हो जाता है या वह बादवाले वर्ग के पंचम वर्ण में भी बदल सकता है।
जैसे- अहम् + कार =अहंकार
पम् + चम =पंचम
सम् + गम =संगम

(2) यदि ‘त्-द्’ के बाद ‘ल’ रहे तो ‘त्-द्’ ‘ल्’ में बदल जाते है और ‘न्’ के बाद ‘ल’ रहे तो ‘न्’ का अनुनासिक के बाद ‘ल्’ हो जाता है।
जैसे- उत् + लास =उल्लास
महान् + लाभ =महांल्लाभ

(3) किसी वर्ग के पहले वर्ण (‘क्’, ‘च्’, ‘ट्’, ‘त्’, ‘प’) का मेल किसी स्वर या वर्ग के तीसरे, चौथे वर्ण या र ल व में से किसी वर्ण से हो तो वर्ण का पहला वर्ण स्वयं ही तीसरे वर्ण में परिवर्तित हो जाता है। यथा-

दिक् + गज =दिग्गज (वर्ग के तीसरे वर्ण से संधि)
षट् + आनन =षडानन (किसी स्वर से संधि)
षट् + रिपु =षड्रिपु (र से संधि)

अन्य उदाहरण
जगत् + ईश =जगतदीश
तत् + अनुसार =तदनुसार
वाक् + दान =वाग्दान
दिक् + दर्शन =दिग्दर्शन
वाक् + जाल =वगजाल
अप् + इन्धन =अबिन्धन
तत् + रूप =तद्रूप

(4) यदि ‘क्’, ‘च्’, ‘ट्’, ‘त्’, ‘प’, के बाद ‘न’ या ‘म’ आये, तो क्, च्, ट्, त्, प, अपने वर्ग के पंचम वर्ण में बदल जाते हैं। जैसे-

वाक्+मय =वाड्मय
अप् +मय =अम्मय
षट्+मार्ग =षणमार्ग
जगत् +नाथ=जगत्राथ
उत् +नति =उत्रति
षट् +मास =षण्मास

(5) सकार और तवर्ग का शकार और चवर्ग के योग में शकार और चवर्ग तथा षकार और टवर्ग के योग में षकार और टवर्ग हो जाता है। जैसे-

स्+शरामस् +शेते =रामश्शेते
त्+चसत् +चित् =सच्चित्
त्+छमहत् +छात्र =महच्छत्र
त् +णमहत् +णकार =महण्णकार
ष्+तद्रष् +ता =द्रष्टा
त्+टबृहत् +टिट्टिभ=बृहटिट्टिभ

(6) यदि वर्गों के अन्तिम वर्णों को छोड़ शेष वर्णों के बाद ‘ह’ आये, तो ‘ह’ पूर्ववर्ण के वर्ग का चतुर्थ वर्ण हो जाता है और ‘ह्’ के पूर्ववाला वर्ण अपने वर्ग का तृतीय वर्ण।
जैसे-

उत्+हत =उद्धत
उत्+हार =उद्धार
वाक् +हरि =वाग्घरि

(7) स्वर के साथ छ का मेल होने पर छ के स्थान पर ‘च्छ’ हो जाता है।
जैसे-

परि + छेद= परिच्छेद
शाला + छादन= शालाच्छादन
आ + छादन= आच्छादन

(8) त् या द् का मेल च या छ से होने पर त् या द् के स्थान पर च् होता है; ज या झ से होने पर ज्; ट या ठ से होने पर ट्; ड या ढ से होने पर ड् और ल होने पर ल् होता है।
उदाहरण-

जगत् + छाया =जगच्छाया
उत् + चारण =उच्चारण
सत् + जन =सज्जन
तत् + लीन =तल्लीन

(9) त् का मेल किसी स्वर, ग, घ, द, ध, ब, भ, र से होने पर त् के स्थान पर द् हो जाता है।
जैसे-

सत् + इच्छा =सदिच्छा
जगत् + ईश =जगदीश
तत् + रूप =तद्रूप
भगवत् + भक्ति =भगवद् भक्ति

(10) त् या द् का मेल श से होने पर त् या द् के स्थान पर च् और श के स्थान पर छ हो जाता है।
जैसे-

उत् + श्वास =उच्छवास
सत् + शास्त्र =सच्छास्त्र

(11) त् या द् का मेल ह से होने पर त् या द् के स्थान पर द् और ह से स्थान पर ध हो जाता है।
जैसे-पद् + हति =पद्धति
उत् + हार =उद्धार

(12) म् का क से म तक किसी वर्ण से मेल होने पर म् के स्थान पर उस वर्ण वाले वर्ग का पाँचवाँ वर्ण हो जाएगा।
जैसे-

सम् + तुष्ट =सन्तुष्ट
सम् + योग =संयोग

(3)विसर्ग संधि ( Combination Of Visarga ) :- विसर्ग के साथ स्वर या व्यंजन मेल से जो विकार होता है, उसे ‘विसर्ग संधि’ कहते है।
दूसरे शब्दों में- स्वर और व्यंजन के मेल से विसर्ग में जो विसर्ग होता है, उसे ‘विसर्ग संधि’ कहते है।
इसे हम ऐसे भी कह सकते हैं- विसर्ग ( : ) के साथ जब किसी स्वर अथवा व्यंजन का मेल होता है, तो उसे विसर्ग-संधि कहते हैं।

कुछ नियम इस प्रकार हैं-

(1) यदि विसर्ग के पहले ‘अ’ आये और उसके बाद वर्ग का तृतीय, चतुर्थ या पंचम वर्ण आये या य, र, ल, व, ह रहे तो विसर्ग का ‘उ’ हो जाता है और यह ‘उ’ पूर्ववर्ती ‘अ’ से मिलकर गुणसन्धि द्वारा ‘ओ’ हो जाता है।
जैसे-

मनः + रथ =मनोरथ
सरः + ज =सरोज
मनः + भाव =मनोभाव
पयः + द =पयोद
मनः + विकार = मनोविकार
पयः + धर =पयोधर
मनः + हर =मनोहर
वयः + वृद्ध =वयोवृद्ध
यशः + धरा =यशोधरा
सरः + वर =सरोवर
तेजः + मय =तेजोमय
यशः + दा =यशोदा
पुरः + हित =पुरोहित
मनः + योग =मनोयोग

(2) यदि विसर्ग के पहले इ या उ आये और विसर्ग के बाद का वर्ण क, ख, प, फ हो, तो विसर्ग ‘ष्’ में बदल जाता है।
जैसे-

निः + कपट =निष्कपट
निः + फल =निष्फल
निः + पाप =निष्पाप
दुः + कर =दुष्कर

(3) विसर्ग से पूर्व अ, आ तथा बाद में क, ख या प, फ हो तो कोई परिवर्तन नहीं होता।
जैसे-

प्रातः + काल= प्रातःकाल
पयः + पान= पयःपान
अन्तः + करण= अन्तःकरण
अंतः + पुर= अंतःपुर

(4) यदि ‘इ’ – ‘उ’ के बाद विसर्ग हो और इसके बाद ‘र’ आये, तो ‘इ’ – ‘उ’ का ‘ई’ – ‘ऊ’ हो जाता है और विसर्ग लुप्त हो जाता है।
जैसे-

निः + रव =नीरव
निः + रस =नीरस
निः + रोग =नीरोग
दुः + राज =दूराज

(5) यदि विसर्ग के पहले ‘अ’ और ‘आ’ को छोड़कर कोई दूसरा स्वर आये और विसर्ग के बाद कोई स्वर हो या किसी वर्ग का तृतीय, चतुर्थ या पंचम वर्ण हो या य, र, ल, व, ह हो, तो विसर्ग के स्थान में ‘र्’ हो जाता है। जैसे-

निः + उपाय =निरुपाय
निः + झर =निर्झर
निः + जल =निर्जल
निः + धन =निर्धन
दुः + गन्ध =दुर्गन्ध
निः + गुण =निर्गुण
निः + विकार =निर्विकार
दुः + आत्मा =दुरात्मा
दुः + नीति =दुर्नीति
निः + मल =निर्मल

(6) यदि विसर्ग के बाद ‘च-छ-श’ हो तो विसर्ग का ‘श्’, ‘ट-ठ-ष’ हो तो ‘ष्’ और ‘त-थ-स’ हो तो ‘स्’ हो जाता है।
जैसे-

निः + चय=निश्रय
निः + छल =निश्छल
निः + तार =निस्तार
निः + सार =निस्सार
निः + शेष =निश्शेष
निः + ष्ठीव =निष्ष्ठीव

(7) यदि विसर्ग के आगे-पीछे ‘अ’ हो तो पहला ‘अ’ और विसर्ग मिलकर ‘ओ’ हो जाता है और विसर्ग के बादवाले ‘अ’ का लोप होता है तथा उसके स्थान पर लुप्ताकार का चिह्न (ऽ) लगा दिया जाता है।
जैसे-प्रथमः + अध्याय =प्रथमोऽध्याय
मनः + अभिलषित =मनोऽभिलषित
यशः + अभिलाषी= यशोऽभिलाषी

(8) विसर्ग से पहले आ को छोड़कर किसी अन्य स्वर के होने पर और विसर्ग के बाद र रहने पर विसर्ग लुप्त हो जाता है और यदि उससे पहले ह्रस्व स्वर हो तो वह दीर्घ हो जाता है।
जैसे-

नि: + रस =नीरस
नि: + रोग =नीरोग

(9) विसर्ग के बाद श, ष, स होने पर या तो विसर्ग यथावत् रहता है या अपने से आगे वाला वर्ण हो जाता है।
जैसे-

नि: + संदेह =निःसंदेह अथवा निस्संदेह
नि: + सहाय =निःसहाय अथवा निस्सहाय

हिन्दी की स्वतंत्र संधियाँ

उपर्युक्त तीनों संधियाँ संस्कृत से हिन्दी में आई हैं। हिन्दी की निम्नलिखित छः प्रवृत्तियोंवाली संधियाँ होती हैं-

(1) महाप्राणीकरण (2) घोषीकरण (3) ह्रस्वीकरण (4) आगम (5) व्यंजन-लोपीकरण और (6) स्वर-व्यंजन लोपीकरण

इसे विस्तार से इस प्रकार समझा जा सकता है-

(क) पूर्व स्वर लोप : दो स्वरों के मिलने पर पूर्व स्वर का लोप हो जाता है। इसके भी दो प्रकार हैं-

(1) अविकारी पूर्वस्वर-लोप : जैसे- मिल + अन =मिलन
छल + आवा =छलावा

(2) विकारी पूर्वस्वर-लोप : जैसे- भूल + आवा =भुलावा
लूट + एरा =लुटेरा

(ख) ह्रस्वकारी स्वर संधि : दो स्वरों के मिलने पर प्रथम खंड का अंतिम स्वर ह्रस्व हो जाता है। इसकी भी दो स्थितियाँ होती हैं-

1. अविकारी ह्रस्वकारी : जैसे- साधु + ओं= साधुओं
डाकू + ओं= डाकुओं

2. विकारी ह्रस्वकारी :
जैसे- साधु + अक्कड़ी= सधुक्कड़ी
बाबू + आ= बबुआ

(ग) आगम स्वर संधि : इसकी भी दो स्थितियाँ हैं-

1. अविकारी आगम स्वर : इसमें अंतिम स्वर में कोई विकार नहीं होता।
जैसे- तिथि + आँ= तिथियाँ
शक्ति + ओं= शक्तियों

2. विकारी आगम स्वर: इसका अंतिम स्वर विकृत हो जाता है।
जैसे- नदी + आँ= नदियाँ
लड़की + आँ= लड़कियाँ

(घ) पूर्वस्वर लोपी व्यंजन संधि:- इसमें प्रथम खंड के अंतिम स्वर का लोप हो जाया करता है।
जैसे- तुम + ही= तुम्हीं
उन + ही= उन्हीं

(ड़) स्वर व्यंजन लोपी व्यंजन संधि:- इसमें प्रथम खंड के स्वर तथा अंतिम खंड के व्यंजन का लोप हो जाता है।
जैसे- कुछ + ही= कुछी
इस + ही= इसी

(च) मध्यवर्ण लोपी व्यंजन संधि:- इसमें प्रथम खंड के अंतिम वर्ण का लोप हो जाता है।
जैसे- वह + ही= वही
यह + ही= यही

(छ) पूर्व स्वर ह्रस्वकारी व्यंजन संधि:- इसमें प्रथम खंड का प्रथम वर्ण ह्रस्व हो जाता है।
जैसे- कान + कटा= कनकटा
पानी + घाट= पनघट या पनिघट

(ज) महाप्राणीकरण व्यंजन संधि:- यदि प्रथम खंड का अंतिम वर्ण ‘ब’ हो तथा द्वितीय खंड का प्रथम वर्ण ‘ह’ हो तो ‘ह’ का ‘भ’ हो जाता है और ‘ब’ का लोप हो जाता है।
जैसे- अब + ही= अभी
कब + ही= कभी
सब + ही= सभी

(झ) सानुनासिक मध्यवर्णलोपी व्यंजन संधि:- इसमें प्रथम खंड के अनुनासिक स्वरयुक्त व्यंजन का लोप हो जाता है, उसकी केवल अनुनासिकता बची रहती है।
जैसे- जहाँ + ही= जहीं
कहाँ + ही= कहीं
वहाँ + ही= वहीं

(ञ) आकारागम व्यंजन संधि:- इसमें संधि करने पर बीच में ‘आकार’ का आगम हो जाया करता है।
जैसे- सत्य + नाश= सत्यानाश
मूसल + धार= मूसलाधार

स्वर संधि के उदाहरण

(अ, आ)

संधिपदविच्छेदजिन स्वरों में संधि हुई
अभ्युदयअभि +उदयइ + उ= यु (यण)
अत्याचारअति+आचारइ + आ= या (यण)
अन्वेषणअनु +एषणउ + ए= वे (यण)
अभ्यागतअभि +आगतइ + आ= या (यण)
अभीष्टअभि + इष्टइ + इ= ई (दीर्घ)
अत्यन्तअति + अन्तइ + अ= य (यण)
अधीश्र्वरअधि + ईश्र्वरइ + ई= ई (दीर्घ)
आद्यन्तआदि+अन्तइ + अ= य (यण)
अत्युत्तमअति+उत्तमइ +उ= यु (यण)
अतीवअति + इवइ + इ= ई (दीर्घ)
अन्यान्यअन्य + अन्यअ + अ= आ (दीर्घ)
असुरालयअसुर + आलयअ + आ= आ (दीर्घ)
आनन्दोत्सवआनंद + उत्सवअ + उ= ओ (गुण)
आशातीतआशा + अतीतआ + अ= आ (दीर्घ)
अन्वीक्षणअनु + ईक्षणउ + ई= वी (यण)
अन्नाभावअन्न + अभावअ + अ= आ (दीर्घ)
अक्षौहिणीअक्ष + ऊहिणीअ + ऊ= औ (यण)
अल्पायुअल्प + आयुअ + अ= आ (दीर्घ)
अनावृष्टिअन + आवृष्टिअ + इ= य (दीर्घ)
अत्यावश्यकअति + आवश्यकइ + अ= य (यण)
अत्युष्मअति +उष्मइ + अ= य (यण)
अनुपमेयअन् + उपमेयअ + इ= य (दीर्घ)
अन्योक्तिअन्य + उक्तिअ + इ= य (दीर्घ)
अधीश्वरअधि + ईश्वरइ + ई= ई (दीर्घ)

(इ, उ, ए)

संधिपदविच्छेदजिन स्वरों में संधि हुई
इत्यादिइति + आदिइ + आ= या (यण)
ईश्वरेच्छाईश्वर + इच्छाअ + इ= ए (गुण)
उपेक्षाउप + ईक्षाअ + ई= ए (गुण)
उर्मिलेशउर्मिला + ईशआ + ई= ए (गुण)
ऊहापोहऊह + अपोहऊ + अ= आ (दीर्घ)
उत्तरायणउत्तर + अयनअ + अ= आ (दीर्घ)
उपर्युक्तउपरि + उक्तइ + उ= यु (यण)
उमेशउमा + ईशआ + ई= ए (गुण)
एकैकएक + एकअ + ए= ऐ (वृद्धि)
एकांकीएक + अंकीअ + अ= आ (दीर्घ)
एकाननएक + आननअ + आ= आ (दीर्घ)
एकेश्वरएक + ईश्वरअ + ई= ए (गुण)
ऐतयारण्यकऐतरेय + आरण्यकअ + आ= आ (दीर्घ)

( क, ख )

संधिपदविच्छेदजिन स्वरों में संधि हुई
कमलेशकमल + ईशअ + ई= ए (गुण)
कपीशकपि + ईशइ + ई= ई (दीर्घ)
करुणामृतकरुण + अमृतअ + अ= आ (दीर्घ)
कामान्धकाम + अन्धअ + अ= आ (दीर्घ)
कामारिकाम + अरिअ + अ= आ (दीर्घ)
कृपाचार्यकृपा + आचार्यआ + आ= आ (दीर्घ)
कृपाकांक्षीकृपा + आकांक्षीआ + आ= आ (दीर्घ)
कृष्णानन्दकृष्ण + आनंदअ + आ= आ (दीर्घ)
केशवारिकेशव + अरिअ + अ= आ (दीर्घ)
कोमलांगीकोमल + अंगीअ + अ= आ (दीर्घ)
कंसारिकंस + अरिअ + अ= आ (दीर्घ)
कवीन्द्रकवि + इन्द्रइ + इ= ई (दीर्घ)
कवीशकवि + ईशइ + ई= ई (दीर्घ)
कल्पान्तकल्प + अन्तअ + अ= आ (दीर्घ)
कुशासनकुश + आसनअ + आ= आ (दीर्घ)
कुलटाकुल + अटानिपात से संधि
कर्णोद्धारकर्ण + उद्धारअ + उ= ओ (गुण)
कौरवारिकौरव + अरिअ + अ= आ (दीर्घ)
केशान्तकेश + अन्तअ + अ= आ (दीर्घ)
खगेश्वरखग + ईश्वरअ + ई ए (गुण)
खगेशखग + ईशअ + अ= ए (गुण)
खगेन्द्रखग + इन्द्रअ + इ= ए (गुण)

( ग, घ )

संधिपदविच्छेदजिन स्वरों में संधि हुई
गंगोदकगंगा + उदकआ + उ= ओ (गुण)
गजेन्द्रगज + इन्द्रअ + इ= ए (गुण)
गत्यवरोधगति + अवरोधइ + अ= य (यण)
गायकगै + अकऐ + अ= आय (अयादि)
गायिकागै + इकाऐ + इ= आयि (अयादि)
ग्रामोद्धारग्राम + उद्धारअ + उ= ओ (गुण)
गिरीशगिरि + ईशइ + ई= ई (दीर्घ)
गजाननगज + आननअ + आ= आ (दीर्घ)
गणेशगण + ईशअ + ई= ए (गुण)
गिरीन्द्रगिरि + इन्द्रइ + इ= ई (दीर्घ)
ग्रामोद्योगग्राम + उद्योगअ + उ= ओ (गुण)
गुरूपदेशगुरु + उपदेशउ + उ= ऊ (दीर्घ)
गायनगै + अनऐ + अ= आय (अयादि)
गत्यात्मकतागति + आत्मकताइ + आ= या (यण)
गंगौघगंगा + ओघआ + ओ= औ (वृद्धि)
गंगोर्मिगंगा + ऊर्मिआ + ऊ= ओ (गुण)
गीतांजलिगीत + अंजलिअ + अ= आ (दीर्घ)
गंगैश्वर्यगंगा + ऐश्वर्यआ + ऐ= ऐ (वृद्धि)
गवाक्षगो + अक्षओ + अ= व
गीत्युपदेशगीति + उपदेशइ + उ=यु (यण)
गेयात्मकतागेय + आत्मकताअ + आ= आ (दीर्घ)
गोत्राध्यायगोत्र + अध्यायअ + अ= आ (दीर्घ)
गौर्यादेशगौरी + आदेशई + आ= या (यण)
गंगेशगंगा + ईशआ + ई= ए (गुण)
गुरवेगुरो + ए
गृहौत्सुक्यगृह + औत्सुक्यअ + औ= औ (वृद्धि)
गव्यमगो + यम्ओ + य= 
घनानंदघन + आनंदअ + आ= आ (दीर्घ)
घनान्धकारघन + अन्धकारअ + अ= आ (दीर्घ)

( च, छ )

संधिपदविच्छेदजिन स्वरों में संधि हुई
चतुराननचतुर + आननअ + आ= आ (दीर्घ)
चन्द्राकारचन्द्र + आकारअ + आ= आ (दीर्घ)
चतुराननचतुर + आननअ + आ= आ (दीर्घ)
चन्द्राकारचन्द्र + आकारअ + आ= आ (दीर्घ)
चन्द्रोदयचन्द्र + उदयअ + उ= ओ (गुण)
चरणायुधचरण + आयुधअ + आ= आ (दीर्घ)
चरणामृतचरण + अमृतअ + अ= आ (दीर्घ)
चरणारविंदचरण + अरविंदअ + अ= आ (दीर्घ)
चमूत्साहचमू + उत्साहऊ + उ= ऊ (दीर्घ)
चयनचे + अनए + अ= अय (अयादि)
चरित्रांकनचरित्र + अंकनअ + अ= आ (दीर्घ)
चिरायुचिर + आयुअ + आ= आ (दीर्घ)
चिन्तोन्मुक्तचिन्ता + उन्मुक्तआ + उ= ओ (गुण)
छात्रावस्थाछात्र + अवस्थाअ + अ= आ (दीर्घ)
छात्रावासछात्र + आवासअ + आ= आ (दीर्घ)

( ज, झ )

संधिपदविच्छेदजिन स्वरों में संधि हुई
जलौघजल + ओघअ + ओ= औ (वृद्धि)
जलाशयजल + आशयअ + आ= आ (दीर्घ)
जन्मान्तरजन्म + अन्तरअ + अ= आ (दीर्घ)
जनाश्रयजन + आश्रयअ + आ= आ (दीर्घ)
जनकांगजाजनक + अंगजाअ + अ= आ (दीर्घ)
जलोर्मिजल + उर्मिअ + ऊ= ओ (गुण)
जन्मोत्सवजन्म + उत्सवअ + उ= ओ (गुण)
जानकोशजानकी + ईशई + ई= ई (दीर्घ)
जितेन्द्रियजित + इन्द्रियअ + इ= ए (गुण)
जीर्णांचलजीर्ण + अंचलअ + अ= आ (दीर्घ)
जिह्वाग्रजिह्वा + अग्रआ + अ= आ (दीर्घ)
झंझानिलझंझा + अनिलआ + अ= आ (दीर्घ)
झण्डोत्तोलनझंडा + उत्तोलनआ + उ= ओ (गुण)
टिकैतटिक + ऐतअ + ऐ=ऐ (वृद्धि)
डिम्बोद्घोषडिम्ब + उद्घोषअ + उ= ओ (गुण)

( त, थ )

संधिपदविच्छेदजिन स्वरों में संधि हुई
तथागततथा + आगतआ + आ= आ (दीर्घ)
तथापितथा + अपिआ + अ= आ (दीर्घ)
तथैवतथा + एवआ + ए= ऐ (वृद्धि)
तिमिराच्छादिततिमिर + आच्छादितअ + आ= आ (दीर्घ)
तारकेश्वरतारक + ईश्वरअ + ई= ए (गुण)
तारकेशतारक + ईशअ + ई= ए (गुण)
तपेश्वरतप + ईश्वरअ + ई= ए (गुण)
तमसाच्छन्नतमस + आच्छन्नअ + आ= आ (दीर्घ)
तिमिरारितिमिर + अरिअ + अ= आ (दीर्घ)
तुरीयावस्थातुरीय + अवस्थाअ + अ= आ (दीर्घ)
तुषारावृत्ततुषार + आवृत्तअ + आ= आ (दीर्घ)
त्रिगुणातीतत्रिगुण + अतीतअ + अ= आ (दीर्घ)
थानेश्वरथाना + ईश्वरआ + ई= ए (गुण)

( द )

संधिपदविच्छेदजिन स्वरों में संधि हुई
दर्शनार्थदर्शन + अर्थअ + अ= आ (दीर्घ)
दावाग्निदाव + अग्निअ + अ= आ (दीर्घ)
दावानलदाव + अनलअ + अ= आ (दीर्घ)
देवर्षिदेव + ऋषिअ + ऋ= अर् (गुण)
देवेशदेव + ईशअ + ई= ए (गुण)
देवेन्द्रदेव + इन्द्रअ + इ= ए (गुण)
देवागमनदेव + आगमनअ + आ= आ (दीर्घ)
देव्यागमदेवी + आगमई + आ= या (यण)
दूतावासदूत + आवासअ + आ= आ (दीर्घ)
देशाटनदेश + अटनअ + अ= आ (दीर्घ)
दीपावलीदीप + अवलीअ + अ= आ (दीर्घ)
द्रोणाचार्यद्रोण + आचार्यअ + आ= आ (दीर्घ)
दंडकारण्यदंडक + अरण्यअ + अ= आ (दीर्घ)
दक्षिणायनदक्षिण + अयनअ + अ= आ (दीर्घ)
दध्योदनदधि + ओदनइ + ओ= यो (यण)
दर्शनेच्छादर्शन + इच्छाअ + इ= ए (गुण)
दशाननदश + आननअ + आ= आ (दीर्घ)
दयानंददया+ आनंदआ + आ= आ (दीर्घ)
दानवारिदानव + अरिअ + अ=आ (दीर्घ)
दासानुदासदास + अनुदासअ + अ=आ (दीर्घ)
दिनांकदिन + अंकअ + अ=आ (दीर्घ)
दिनांतदिन + अन्तअ + अ=आ (दीर्घ)
दिव्यास्त्रदिव्य + अस्त्रअ + अ=आ (दीर्घ)
दीक्षान्तदीक्षा + अन्तआ + अ= आ (दीर्घ)
दीपोत्सवदीप + उत्सवअ + उ= ओ (गुण)
दूरागतदूर + आगतअ + आ= आ (दीर्घ)
देवालयदेव + आलयअ + आ= आ (दीर्घ)
देवांगनादेव + अंगनाअ + अ= आ (दीर्घ)
देवोत्थानदेव + उत्थानअ + उ= ओ (गुण)
देशांतरदेश + अन्तरअ + अ=आ (दीर्घ)
दैत्यारिदैत्य + अरिअ + अ=आ (दीर्घ)
द्वाराकाधीशद्वारका + अधीशआ + अ= आ (दीर्घ)
दर्शनाचार्यदर्शन + आचार्यअ + आ= (दीर्घ)
दुग्धाहारदुग्ध + आहारअ + आ= आ (दीर्घ)
देवांशुदेव + अंशुअ + अ= आ (दीर्घ)

( ध )

संधिपदविच्छेदजिन स्वरों में संधि हुई
धर्माधिकारीधर्म + अधिकारीअ + अ=आ (दीर्घ)
धर्मांधधर्म + अन्धअ + अ=आ (दीर्घ)
धर्मात्माधर्म + आत्माअ + आ= आ (दीर्घ)
धर्मोपदेशधर्म + उपदेशअ + उ= ओ (गुण)
धर्मार्थधर्म + अर्थअ + अ= आ (दीर्घ)
धनेशधन + ईशअ + इ=ए (गुण)
धनाधीशधन + अधीशअ + अ= आ (दीर्घ)
धनादेशधन + आदेशअ + आ= आ (दीर्घ)
घनानंदघन + आनंदअ + आ= आ (दीर्घ)
धर्माधर्मधर्म + अधर्मअ + अ=आ (दीर्घ)
धर्माचार्यधर्म + आचार्यअ + आ= आ (दीर्घ)
धर्मावतारधर्म + अवतारअ + अ= आ (दीर्घ)
धारोष्णधारा + ऊष्णआ + ऊ= ओ (गुण)
धीरोदात्तधीर + उदात्तअ + उ= ओ (गुण)
धीरोद्धतधीर + उद्धतअ + उ= ओ (गुण)
धूमाच्छन्नधूम + आच्छन्नअ + आ= आ (दीर्घ)
ध्वजोत्तोलनध्वजा + उत्तोलनआ + उ= ओ (गुण)
ध्वन्यर्थध्वनि + अर्थइ + अ= य (यण)
ध्वन्यात्मकध्वनि + आत्मकइ + आ= या (यण)
धावकधौ + अकऔ + अ= आव (अयादि)

( न )

संधिपदविच्छेदजिन स्वरों में संधि हुई
नागेन्द्रनाग + इन्द्रअ + इ= ए (गुण)
नागेशनाग + ईशअ + ई= ए (गुण)
नरेशनर + ईशअ + ई= ए (गुण)
नरेन्द्रनर + इन्द्रअ + इ= ए (गुण)
नदीशनदी + ईशई + ई= ई (दीर्घ)
नयनने + अनए + अ= अय (अयादि)
नायकनै + अकऐ + अ= आय (अयादि)
नायिकानै + इकाऐ + इ= आयि (अयादि)
नवोदयनव + उदयअ + उ= ओ (गुण)
नारायणनर + अयनअ + अ= आ (दीर्घ)
नारीश्वरनारी + ईश्वरई + ई= ई (दीर्घ)
निरानंदनिरा + आनंदआ + आ= आ (दीर्घ)
नीचाशयनीच + आशयअ + आ= आ (दीर्घ)
नीलांबरनील + अम्बरअ + अ= आ (दीर्घ)
नीलांजलनील + अंजलअ + अ= आ (दीर्घ)
नीलोत्पलनील + उत्पलअ + उ= ओ (गुण)
न्यूननि + ऊनइ + ऊ= यू (यण)
नयनाम्बुनयन + अम्बुअ + अ= आ (दीर्घ)
नयनाभिरामनयन + अभिरामअ + अ= आ (दीर्घ)
नवोढ़ानव + ऊढ़ाअ + ऊ= ओ (गुण)
नाविकनौ + इकऔ + इ आवि (अयादि)
न्यायालयन्याय + आलयअ + आ= आ (दीर्घ)
न्यायाधीशन्याय + अधीशअ + आ= आ (दीर्घ)
नक्षत्रेशनक्षत्र + ईशअ + ई= ए (गुण)
नृत्यालयनृत्य + आलयअ + आ= आ (दीर्घ)
निम्नांकितनिम्न + अंकितअ + अ= आ (दीर्घ)
निम्नानुसारनिम्न + अनुसारअ + आ= आ (दीर्घ)

( प )

संधिपदविच्छेदजिन स्वरों में संधि हुई
पंचाननपंच + आननअ + आ= आ (दीर्घ)
पंचामृतपंच + अमृतअ + अ= आ (दीर्घ)
पंचाग्निपंच + अग्निअ + अ= आ (दीर्घ)
पत्राचारपत्र + आचारअ + आ= आ (दीर्घ)
पदोन्नतिपद + उन्नतिअ + उ= ओ (गुण)
परमार्थपरम + अर्थअ + अ= आ (दीर्घ)
परमौषधपरम + औषधअ + औ= औ (वृद्धि)
परमौषधिपरम + ओषधिअ + ओ= औ (वृद्धि)
परीक्षापरि + ईक्षाइ + ई= ई (दीर्घ)
परोपकारपर+ उपकारअ + उ= ओ (गुण)
परीक्षार्थीपरीक्षा + अर्थीआ + अ= आ (दीर्घ)
पवनपो + अनओ + अ=अव (अयादि)
पावनपौ + अनऔ + अ= आव (अयादि)
पावकपौ + अकऔ + अ= आव (अयादि)
पवित्रपो + इत्रओ + इ= अवि (अयादि)
पदाक्रांतपद + आक्रांतअ + आ= आ (दीर्घ)
पदाधिकारीपद + अधिकारीअ + अ= आ (दीर्घ)
पदावलिपद + अवलिअ + अ= आ (दीर्घ)
पद्माकरपद्म + आकरअ + अ= आ (दीर्घ)
परार्थपर + अर्थअ + अ= आ (दीर्घ)
परमेश्वरपरम + ईश्वरअ + ई= ए (गुण)
पराधीनपर + अधीनअ + अ= आ (दीर्घ)
परमात्मापरम + आत्माअ + आ= आ (दीर्घ)
पर्वतेश्वरपर्वत + ईश्वरअ + ई= ए (गुण)
पश्चिमोत्तरपश्चिम + उत्तरअ + उ= ओ (गुण)
पाठान्तरपाठ + अन्तरअ + अ= आ (दीर्घ)
पित्रादेशपितृ + आदेशऋ + आ= रा (यण)
पीताम्बरपीत + अम्बरअ + अ= आ (दीर्घ)
पुंडरीकाक्षपुंडरीक + अक्षअ + अ= आ (दीर्घ)
पुण्यात्मापुण्य + आत्माअ + आ= आ (दीर्घ)
पुस्तकालयपुस्तक + आलयअ + आ= आ (दीर्घ)
पुरुषोत्तमपुरुष + उत्तमअ + उ= ओ (गुण)
पूर्वानुरागपूर्व + अनुरागअ + अ= आ (दीर्घ)
पूर्वोदयपूर्व + उदयअ + उ= ओ (गुण)
प्रांगणप्र + आंगणअ + आ= आ (दीर्घ)
प्रत्ययप्रति + अयइ + अ= य (यण)
प्रत्युत्तरप्रति + उत्तरइ + उ= यु (यण)
प्रत्येकप्रति + एकइ + ए= ये (यण)
प्रत्युपकारप्रति + उपकारइ + उ= यु (यण)
प्रत्यक्षप्रति + अक्षइ + अ= य (यण)
प्रोत्साहनप्र + उत्साहनअ + उ= ओ (गुण)
पुष्पोद्यानपुष्प + उद्यानअ + उ= ओ (गुण)
पृथ्वीशपृथ्वी + ईशई + ई= ई (दीर्घ)
प्राणाधारप्राण + आधारअ + आ= आ (दीर्घ)
प्राणेश्वरप्राण + ईश्वरअ + ई= ए (गुण)
पश्वादिपशु + आदिउ + अ= वा (यण)
पश्वधमपशु + अधमउ + अ= व (यण)
परमौदार्यपरम + औदार्यअ + औ= औ (वृद्धि)
प्राचार्यप्र + आचार्यअ + आ= आ (दीर्घ)
प्राध्यापकप्र + अध्यापकअ + आ= आ (दीर्घ)
प्रधानाचार्यप्रधान + आचार्यअ + आ= आ (दीर्घ)

( फ )

संधिपदविच्छेदजिन स्वरों में संधि हुई
फणीन्द्रफणी + इन्द्रई + इ= ई (दीर्घ)
फलेच्छाफल + इच्छाअ + इ= ए (गुण)
फलाहारफ़ल + आहारअ + आ= आ (दीर्घ)
फलादेशफल + आदेशअ + आ= आ (दीर्घ)
फलाकांक्षाफल + आकांक्षाअ + आ= आ (दीर्घ)
फलोदयफल + उदयअ + उ= ओ (गुण)
फेनोज्ज्वलफेन + उज्ज्वलअ + उ= ओ (गुण)
फलाफलफल + अफलअ + अ= आ (दीर्घ)
फलागमफल + आगमअ + आ= आ (दीर्घ)

( ब )

संधिपदविच्छेदजिन स्वरों में संधि हुई
बद्धानुरागबद्ध + अनुरागअ + अ= आ (दीर्घ)
बहुलांशबहुल + अंशअ + अ= आ (दीर्घ)
बालेन्द्रबाल + इन्द्रअ + इ= ए (गुण)
ब्रजेशब्रज + ईशअ + ई= ए (गुण)
बह्मर्षिब्रह्म + ऋषिअ + ऋ=अर (गुण)
ब्रह्मचर्याश्रमब्रह्मचर्य + आश्रमअ + आ= आ (दीर्घ)
ब्रह्मास्त्रब्रह्म + अस्त्रअ + आ= आ (दीर्घ)
बिम्बौष्ठबिम्ब + ओष्ठअ + ओ= औ (वृद्धि)

( भ )

संधिपदविच्छेदजिन स्वरों में संधि हुई
भवनभो + अनओ + अ= अव (अयादि)
भानूदयभानु + उदयउ + उ= ऊ (दीर्घ)
भोजनालयभोजन +आलयअ + आ= आ (दीर्घ)
भाग्योदयभाग्य + उदयअ + उ= ओ (गुण)
भद्रासनभद्र + आसनअ + आ= आ (दीर्घ)
भयातुरभय + आतुरअ + आ= आ (दीर्घ)
भवेशभव + ईशअ + इ= ए (गुण)
भावावेशभाव + आवेशअ + आ= आ (दीर्घ)
भावान्तरभाव + अन्तरअ + अ= आ (दीर्घ)
भाषान्तरभाषा + अन्तरआ + अ= आ (दीर्घ)
भावुकभौ + उकऔ + उ= आवु (अयादि)
भूर्ध्वभू + ऊर्ध्वऊ + ऊ= ऊ (दीर्घ)
भुजगेन्द्रभुजग + इन्द्रअ + इ= ए (गुण)
भुवनेश्वरभुवन + ईश्वरअ + ई= ए (गुण)
भूतेशभूत + ईशअ + ई= ए (गुण)
भूतेश्वरभूत + ईश्वरअ + ई= ए (गुण)

( म )

संधिपदविच्छेदजिन स्वरों में संधि हुई
मतानुसारमत + अनुसारअ + आ= आ (दीर्घ)
मदिरालयमदिरा + आलयआ + आ= आ (दीर्घ)
मंदाग्निमंद + अग्निअ + अ= आ (दीर्घ)
मदांधमद + अंधअ + अ= आ (दीर्घ)
मदोन्मत्तमद + उन्मत्तअ + उ= ओ (गुण)
मध्यांतरमध्य + अन्तरअ + अ= आ (दीर्घ)
मतैक्यमत + ऐक्यअ + ऐ= ऐ (वृद्धि)
महोत्सवमहा + उत्सवआ + उ= ओ (गुण)
महर्षिमहा + ऋषिआ + ऋ= अर् (गुण)
महाशयमहा + आशयआ + आ= आ (दीर्घ)
महात्मामहा + आत्माआ + आ= आ (दीर्घ)
मरणासन्नमरण + आसन्नअ + आ= आ (दीर्घ)
मरणोपरान्तमरण + उपरान्तअ + उ= ओ (गुण)
मल्लिकार्जुनमल्लिक + अर्जुनअ + आ= आ (दीर्घ)
मलयानिलमलय + अनिलअ + अ=आ (दीर्घ)
महेन्द्रमहा + इन्द्रआ + इ= ए (गुण)
महेशमहा + ईशआ + ई= ए (गुण)
महीश्वरमही + ईश्वरई + ई= ई (दीर्घ)
मध्वाचार्यमधु + आचार्यउ + आ= वा (यण)
मातृणमातृ + ऋणऋ + ऋ= ऋ (दीर्घ)
महैश्वर्यमहा + ऐश्वर्यआ + ऐ=ऐ (वृद्धि)
मुनीशमुनि + ईशइ = ई = ई (दीर्घ)
मुनीन्द्रमुनि + इन्द्रइ + इ= ई (दीर्घ)
मुखाकृतिमुख + आकृतिअ + आ= आ (दीर्घ)
मुखाग्निमुख + अग्निअ + अ= आ (दीर्घ)
महोदयमहा + उदयआ + उ= ओ (गुण)
महोपदेशमहा + उपदेशआ + उ= ओ (गुण)
महौजमहा + ओजआ + ओ= औ (वृद्धि)
महौषधमहा + औषधआ + औ= औ (वृद्धि)
मेघाच्छन्नमेघ + आच्छन्नअ + आ= आ (दीर्घ)
मन्वंतरमनु + अन्तरउ + अ= व (यण)
मध्वासवमधु + आसवउ + आ= वा (यण)
मध्यावकाशमध्य + अवकाशअ + अ= आ (दीर्घ)
मार्तण्डमार्त + अण्डअ + अ= आ (दीर्घ)
मृगेन्द्रमृग + इन्द्रअ + इ= ए (गुण)
मृगांकमृग + अंकअ + अ= आ (दीर्घ)
मात्रानंदमातृ + आनंदऋ + आ= रा (यण)

( य )

संधिपदविच्छेदजिन स्वरों में संधि हुई
यथेष्टयथा + इष्टआ + इ= ए (गुण)
यथोचितयथा +उचितआ + उ= ओ (गुण)
यद्यपियदि + अपिइ + अ= य (यण)
यज्ञाग्नियज्ञ + अग्निअ + आ= आ (दीर्घ)
यज्ञोपवीतयज्ञा + उपवीतअ + उ= ओ (गुण)
योगेन्द्रयोग + इन्द्रअ + इ= ए (गुण)

( र )

संधिपदविच्छेदजिन स्वरों में संधि हुई
रक्ताभरक्त + आभअ + आ= आ (दीर्घ)
रमेशरमा+ईशआ + ई= ए (गुण)
रमेन्द्ररमा + इन्द्रआ + इ= ए (गुण)
रसास्वादनरस + आस्वादनअ + आ= आ (दीर्घ)
रजनीशरजनी + ईशई + ई= ई (दीर्घ)
रवींद्ररवि + इंद्रइ + इ= ई (दीर्घ)
रवीशरवि + ईशइ + ई= ई (दीर्घ)
रत्नाकररत्न + आकरअ + आ= आ (दीर्घ)
रसात्मकरस + आत्मकअ + आ= आ (दीर्घ)
रसानुभूतिरस + अनुभूतिअ + अ= आ (दीर्घ)
रसाभासरस + आभासअ + आ= आ (दीर्घ)
राकेशराका + ईशआ + ई= ए (गुण)
राजर्षिराजा + ऋषिआ + ऋ= अर (गुण)
रामायणराम + अयनअ + आ= आ (दीर्घ)
राजेन्द्रराजा + इन्द्रआ + इ= ए (गुण)
रामावतारराम + अवतारअ + अ= आ (दीर्घ)
रामाधारराम + आधारअ + आ= आ (दीर्घ)
राजाज्ञाराजा + आज्ञाआ + आ= आ (दीर्घ)
राघवेन्द्रराघव + इन्द्रअ + इ= ए (गुण)
राज्याभिषेकराज्य + अभिषेकअ + अ= आ (दीर्घ)
रामेश्वरराम + ईश्वरअ + ई= ए (गुण)
रावणेश्वररावण + ईश्वरअ + ई= ए (गुण)
रत्नावलीरत्न + अवलीअ + आ= आ (दीर्घ)
रूद्राक्षरूद्र + अक्षअ + अ= आ (दीर्घ)
रेखांकितरेखा + अंकितअ + अ= आ (दीर्घ)
रेखांशरेखा + अंशअ + अ= आ (दीर्घ)
रोमावलिरोम + अवलिअ + अ= आ (दीर्घ)
रावणरौ + अनऔ + अ= आव (अयादि)
रामानन्दराम + आनंदअ + आ= आ (दीर्घ)

( ल )

संधिपदविच्छेदजिन स्वरों में संधि हुई
लघूर्मिलघु + ऊर्मिउ + ऊ= ऊ (दीर्घ)
लम्बोदरलम्ब + उदरआ + उ= ओ (गुण)
लोकोत्तरलोक + उत्तर
लंकेश्वरलंका + ईश्वरआ + ई= ए (गुण)
लघ्वाहारलघु + आहारउ + आ= वा (यण)
लाटानुप्रासलाट + अनुप्रासअ + आ= आ (दीर्घ)
लिंगानुशासनलिंग + अनुशासनअ + अ= आ (दीर्घ)
लोकोक्तिलोक + उक्तिअ + उ= ओ (गुण)
लोकेशलोक + ईशअ + ई= ए (गुण)
लोकायतनलोक + आयतनअ + आ= आ (दीर्घ)
लीलागारलीला + आगारआ + आ= आ (दीर्घ)
लोपामुद्रालोप + आमुद्राअ + आ= आ (दीर्घ)
लोहिताश्वलोहित + अश्वअ + अ= आ (दीर्घ)
लेखाधिकारीलेखा + अधिकारीआ + अ= आ (दीर्घ)
लुप्तोपमालुप्त + उपमाअ + उ= ओ (गुण)
लोकाधिपतिलोक + अधिपतिअ + अ= आ (दीर्घ)
लोकोत्तरलोक + उत्तरअ + उ= ओ (गुण)
लोटालृ + ओटालृ + ओ= लो (यण)

( व )

संधिपदविच्छेदजिन स्वरों में संधि हुई
वंशांकुरवंश + अंकुरअ + अ= आ (दीर्घ)
वंशानुक्रमवंश + अनुक्रमअ + अ= आ (दीर्घ)
वघूत्सववघू + उत्सवऊ + उ= ऊ (दीर्घ)
वज्रांगवज्र + अंगअ + अ= आ (दीर्घ)
वज्राघातवज्र + आघातअ + आ= आ(दीर्घ)
वज्रायुधवज्र + आयुधअ + आ= आ (दीर्घ)
वनोत्सववन + उत्सवअ + उ= ओ (गुण)
व्यर्थवि + अर्थइ + अ= य (यण)
वसंतोत्सववसंत + उत्सवअ + उ= ओ (गुण)
वसुधैववसुधा + एवआ + ए= ऐ (वृद्धि)
वार्तालापवार्ता + आलापआ + आ= आ (दीर्घ)
वामेश्वरवाम + ईश्वरअ + ई= ए (गुण)
व्यापकवि + आपकइ + आ= या (यण)
व्याप्तवि + आप्तइ + आ= या (यण)
व्याकुलवि + आकुलइ + आ= या (यण)
व्यायामवि + आयामइ + आ= या (यण)
व्याधिवि + आधिइ + आ= या (यण)
व्याघातवि + आघातइ + आ= या (यण)
व्युत्पत्तिवि + उत्पत्तिइ + उ= यु (यण)
व्यूहवि + ऊहइ + ऊ= यू (यण)
विद्योपार्जनविद्या + उपार्जनआ + उ= ओ (गुण)
विधूदयविधु + उदयउ + उ= ऊ (दीर्घ)
विकासोन्मुखविकास + उन्मुखअ + उ= ओ (गुण)
विजयेच्छाविजय + इच्छाअ + इ= ए (गुण)
विचारोचितविचार + उचितअ + उ= ओ (गुण)
विकलांगविकल + अंगअ + अ= आ (दीर्घ)
वीरांगनावीर + अंगनाअ + अ= आ (दीर्घ)
वेदान्तवेद + अन्तअ + अ= आ (दीर्घ)
वेदाध्ययनवेद + अध्ययनअ + अ= आ (दीर्घ)
वनौषधिवन + ओषधिअ + ओ= औ (वृद्धि)
वध्वागमनवधू + आगमनऊ + आ= वा (यण)
वध्वैश्वर्यवधू + ऐश्वर्यऊ + ऐ= वै (यण)
वस्त्रालयवस्त्र + आलयअ + आ= आ (दीर्घ)
वर्णनातीतवर्णन + अतीतअ + अ= आ (दीर्घ)
वर्णाश्रमवर्ण + आश्रमअ + आ= आ (दीर्घ)
वर्गाकारवर्ग + आकारअ + आ= आ (दीर्घ)

( श )

संधिपदविच्छेदजिन स्वरों में संधि हुई
शताब्दीशत + अब्दीअ + अ= आ (दीर्घ)
शकारिशक + अरिअ + अ= आ (दीर्घ)
शब्दालंकारशब्द + अलंकारअ + अ= आ (दीर्घ)
शयनशे + अनए + अ= अय (अयादि)
शरणागतशरण + आगतअ + आ= आ (दीर्घ)
शरणार्थीशरण + अर्थीअ + अ= आ (दीर्घ)
शायकशै + अकऐ + अ= आप (अयादि)
शावकशौ + अकऔ + अ= आव (अयादि)
शास्त्रानुसारशास्त्र + अनुसारअ + अ= आ (दीर्घ)
शास्त्रार्थशास्त्र + अर्थअ + अ= आ (दीर्घ)
शिष्टाचारशिष्ट + आचारअ + आ= आ (दीर्घ)
शिवालयशिव + आलयअ + आ= आ (दीर्घ)
शिलासनशिला + आसनआ + आ= आ (दीर्घ)
शिक्षालयशिक्षा + आलयआ + आ= आ (दीर्घ)
शिक्षार्थीशिक्षा + अर्थीआ + अ= आ (दीर्घ)
शिवेन्द्रशिव + इन्द्रअ + इ= ए (गुण)
शिवाम्बुशिव + अम्बुअ + अ= आ (दीर्घ)
शुद्धोदनशुद्ध + ओदनअ + ओ= 
शुभारंभशुभ + आरंभअ + आ= आ (दीर्घ)
शुभ्रांशुशुभ + अंशुअ + आ= आ (दीर्घ)
शुभेच्छाशुभ + इच्छाअ + इ= ए (गुण)
श्वेताम्बरश्वेत + अम्बरअ + अ= आ (दीर्घ)
श्रवणश्रो + अनओ + अ= अव (अयादि)
श्रावणश्रौ + अनऔ + अ= आव (अयादि)
श्लोकाबद्धश्लोक + आबद्धअ + आ= आ (दीर्घ)
षोड्शोपचारषोड्श + उपचारअ + उ= ओ (गुण)
सत्याग्रहसत्य+आग्रहअ + आ= आ (दीर्घ)
सभाध्यक्षसभा + अध्यक्षअ + अ= आ (दीर्घ)
सावधानस + अवधानअ + अ= आ (दीर्घ)
स्वल्पसु + अल्पउ + अ= व (यण)

( ह )

संधिपदविच्छेदजिन स्वरों में संधि हुई
हरीशहरि + ईशइ + ई= ई (दीर्घ)
हर्षोल्लासहर्ष + उल्लासअ + उ= ओ (गुण)
हताशहत + आशअ + आ= आ (दीर्घ)
हरिणाक्षीहरिण + अक्षीअ + अ= आ (दीर्घ)
हताहतहत + आहतअ + आ= आ (दीर्घ)
हितोपदेशहित + उपदेशअ + उ= ओ (गुण)
हिमालयहिम + आलयअ + आ= आ (दीर्घ)
हितैषीहित + ऐषीअ + ऐ= ऐ (वृद्धि)
हीनावस्थाहीन + अवस्थाअ + अ= आ (दीर्घ)
हास्यास्पदहास्य + आस्पदअ + आ= आ (दीर्घ)
क्षुधातुरक्षुधा + आतुरआ + आ= आ (दीर्घ)
त्रिपुरारित्रिपुर + अरिअ + अ= आ (दीर्घ)
त्रिभुजाकारत्रिभुज + आकारअ + आ= आ (दीर्घ)
ज्ञानेशज्ञान + ईशअ + ई= ए (गुण)
ज्ञानेश्वरज्ञान + ईश्वरअ + ई= ए (गुण)
ज्ञानांजनज्ञान + अंजनअ + अ= आ (दीर्घ)
ज्ञानेन्द्रियज्ञान + इन्द्रियअ + इ= ए (गुण)
क्षुद्रात्माक्षुद्र + आत्माअ + आ= आ (दीर्घ)
क्षुधार्त्तक्षुधा + आर्त्तआ + आ= आ (दीर्घ)

विसर्ग संधि-सूचि

( अ )

अब्ज= अप् + जअम्मय= अप् + मय
आकृष्ट= आकृष् + तअहंकार= अहम् + कार
अजन्त= अच् + अन्तआच्छादन= आ + छादन
अबिन्धन= अप्+ इन्धनअभिषेक अभि + सेक
अज्लुप्त= अच् + लुप्तअब्माधुर्य= अप् + माधुर्य
अब्भरण= अप् + हरणअज्झीन= अच् + हीन
अबादान= अप् + आदानअज्झरण= अच् + हरण
अनुच्छेद= अनु + छेदअब्नदी= अप् + नदी

( उ )

उद्गम= उत् + गमउद्द्घाटन= उत् + घाटन
उड्डयन= उत् + डयनउद्याम= उत् + याम
उद्धत= उत् + ह्रतउन्नयन= उत् + नयन
उद्भव= उत् + भवउन्मूलन= उत् + मूलन
उल्लंघन= उत् + लंघनउद्धार= उत् + हार
उदन्त= उत्+ अन्तउच्छृंखल= उत् + श्रृंखल
उद्विग्न= उत् + विग्नउद्योग= उत्+ योग
उदंक= उत् + अंकउद्वर्तन= उत् + वर्तन
उत्सव= उत् + सवउद्द्गार= उत् + गार
उद्द्घोष= उत् + घोषउज्ज्वल= उत् + ज्वल
उद्द्ण्ड= उत् + दंडउद्धत= उत् + हत
उन्नति= उत् + नतिउन्नायक= उत् + नायक
उन्मत्त= उत् + मत्तउन्मुख= उत् + मुख
उल्लास= उत् + लासउदग्र= उत् + अग्र
उदय= उत् + अयउच्छिष्ट= उत् + शिष्ट
उन्मूलित= उत् + मूलितउन्मीलित= उत् + मीलित
उन्माद= उत् + मादउद्द्भास= उत् + भास
उल्लेख= उत् + लेख हारउद्वेग= उत् + वेग
उच्छ्वास= उत् + श्वासऋग्वेद= ऋक + वेद

( क )

कृदन्त= कृत् + अन्तकृष्ण= कृष् + न
किंचित्= किम् + चित्किन्नर= किम्+ नर
कष्ट= कष्+ तक्लिष्ट= क्लिश् + त
काष्ठा= काष् + थाकान्ति= काम् + ति
कुंठित= कुन् + ठितकज्जल= कच् + जल

( च, ज )

चिदानंद= चित् + आनंदचिन्मय= चित् + मय
जगदानन्द= जगत् + आनंदजगदीश= जगत् + ईश
जगन्माता= जगत् + माताजगदाधार= जगत् + आधार
जगन्नाथ= जगत् + नाथजगद्गुरु= जगत् + गुरु

( त )

तल्लीन= तत् + लीनतदाकार= तत् + आकार
तृष्णा= तृष् + नातल्लय= तत्+ लय
तन्मित्र= तत् + मित्रतदात्म= तत् + आत्म
तट्टीका= तत् + टीकातद्धित= तत् + हित
तद्रूप= तत् + रूपतन्नाम= तत् + मात्र
तच्छिव= तत् + शिव

( द )

दुर्जन= दुः + जनदुस्तर= दुः + तर
दुर्नीति= दुः + नीतिदुश्शासन= दुः + शासन
दुराशा= दुः + आशादुष्कर= दुः + कर
दुर्गति= दुः + गतिदुर्दिन= दुः + दिन
दुर्वह= दुः + वहदुराचार= दुः + आचार
दुरवस्था= दुः + अवस्थादुस्साहस= दुः + साहस
दुर्व्यवहार= दुः + व्यवहारदुरात्मा= दुः + आत्मा
दुर्बुद्धि= दुः + बुद्धिदुःस्वप्न= दुः + स्वप्न
दुःख= दुः + खदुष्प्रकृति= दुः + प्रकृति
दुर्ग= दुः + ग

( न )

निरुपाय= निः + उपायनीरव= निः + रव
निरक्षर= नि: + अक्षरनमस्कार= नमः + कार
निश्चल= निः + चलनिस्सन्देह= निः + सन्देह
निस्सार= निः + सारनिरीक्षण= निः + ईक्षण
निष्पाप= निः + पापनिस्सहाय= निः + सहाय
निर्गंध= निः + गंधनिष्फल= निः+ फल
निर्जला= निः+ जलानीरोग= निः+ रोग
निराशा= निः+ आशानिर्मल= निः + मल
निश्छल= निः + छलनिस्सृत= निः + सृत
निराधार= निः + आधारनिरीह= निः + ईह
निष्काम= निः + कामनिरर्थक= निः + अर्थक
निर्विवाद= निः + विवादनिर्झर= निः + झर
निश्चय= निः + चयनिर्भर= निः + भर
निर्विकार= निः + विकारनीरस= निः + रस
निरुद्देश्य= निः + उद्देश्यनिर्जीव= निः + जीव

( प )

पृष्ठ= पृष् + थप्रतिष्ठित= प्रति + स्थित
परिच्छेद= परि + छेदपंचम= पम् + चम
पद्धति= पद् + हतिपरन्तु= परम् + तु
प्रातःकाल= प्रातः + कालपरिष्कार= परि: + कार
पुनर्जन्म= पुनः + जन्मपुरस्कार= पुरः + कार
पयोधि= पयः + धिपुनरपि= पुनः + अपि

( म )

मनोनुकूल= मनः + अनुकूलमनोरम= मनः + रम
मनस्ताप= मनः + तापमनोयोग= मनः + योग
मनोभाव= मनः + भावमनोज= मनः + ज
मनोरथ= मनः + रथमनस्कामना= मनः + कामना (मनोकामना)
मनोविज्ञान= मनः + विज्ञानमनोरंजन= मनः + रंजन
मनोगत= मनः + गत

( स )

शंका= शम् + काशिवच्छाया= शिव + छाया
शांति= शाम् + तिषडानन= षट् + आनन
षण्मास= षट् + मासषड्दर्शन= षट् + दर्शन
षष्ठ= षष् + थसदिच्छा= सत् + इच्छा
सज्जन= सत् + जनसच्छास्त्र= सत् + शास्त्र
संकल्प= सम् + कल्पसंगीत= सम् + गीत
संधि= सम् + धिसंभव= सम् + भव
संवाद= सम् + वादसम्बन्ध= सम् + बन्ध
संन्यासी= सम् + न्यासीसंस्कृत= सम् + कृत
संतोष= सम् + तोषसन्निहित= सम् + निहित
सम्राट= सम् + राट्सदाचार= सत् + आचार
संबल= सम् + बलसद्गति= सत्+ गति
संवत्= सम् + वत्सद्भावना= सत् + भावना
सन्मार्ग= सत् + मार्गसच्चिदानंद= सत्+ चित् + आनंद
संगम= सम् + गमसंगठन= सम् + गठन
संचय= सम् + चयसंयम= सम् + यम
संहार= सम् + हारसंयोग= सम् + योग
संदेह= सम् + देहसंलग्न= सम् + लग्न
संस्कृति= सम् + कृतिसमुच्चय= सम् + उत् + चय
संगठन= सम् + गठनसदानंद= सत् + आनंद
सच्चरित्र= सत् + चरित्रसद्काल= सत् + काल
संसार= सम् + चारसंलिप्त= सम् + लिप्त
स्वच्छंद= स्व + छंदसमुदाय= सम् + उत् + आय
संदीप= सम् + दीपशरदुत्सव= शरद् + उत्सव
सम्पूर्ण= सम् + पूर्णसमन्वय= सम् + अनु + अय
संहार= सम् + हारसद्वाणी= सत् + वाणी
सन्धान= सम् + धानसंताप= सम् + ताप
संगत= सम्+ गतसंथाल= सम् + थाल
संलाप= सम् + लापसंजय= सम् + जय
संस्कर्त्ता= सम् + कर्त्तासंदेश= सम् + देश
शंकर= शम् + करवाग्युद्ध= वाक् + युद्ध
वाङ्मय= वाक् + मयतदर्थ= तत् + अर्थ
यशोदा= यशः + दायशोगान= यशः + गान
यशोधरा= यशः + धराबहिर्मुख= बहिः + मुख
सरोज= सरः + जसरोवर= सरः + वर
भास्पति= भाः + पतिधनुष्टंकार= धनुः + टंकार

हिन्दी की अन्य संधि-सूची

विश्वामित्र= विश्व + मित्रसभी= सब + ही
जहीं= जहाँ + हीअमूचर= आम + चूर
कभी= कब + हीकहीं= कहाँ + ही
पोद्दार= पोत् + दारबचपन= बच्चा + पन
घुड़दौड़= घोड़ा + दौड़लड़कपन= लड़का + पन
जभी= जब + हीअभी= अब + ही
यहीं= यहाँ + हीकुलटा= कुल + अटा
तभी= तब + हीवहीं= वहाँ + ही
हथकड़ी= हाथ + कड़ीकनकटा= कान + कटा
अन्तर्राष्ट्रीय= अन्तः + राष्ट्रीयपनघट= पानी + घाट
स्त्रियोपयोगी= स्त्री + उपयोगी
‘इक’ प्रत्यय जुड़ने पर संधिनुमा परिवर्तन

अर्थ + इक = आर्थिक
धर्म + इक = धार्मिक
उद्योग + इक = औद्योगिक
सप्ताह + इक = साप्ताहिक
दिन + इक = दैनिक
भूगोल + इक= भौगोलिक
समाज + इक = सामाजिक
नीति + इक = नैतिक
दर्शन + इक = दार्शनिक
वर्ष + इक = वार्षिक
इतिहास + इक= ऐतिहासिक
प्रथम + इक = प्राथमिक

Leave A Reply

Your email address will not be published.