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कक्षा चौथी विषय हिन्दी पाठ 6 औद्योगिक तीर्थ कोरबा

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कक्षा चौथी विषय हिन्दी पाठ 6 औद्योगिक तीर्थ कोरबा


शिक्षण -केंद्र : राज्य की प्राकृतिक सम्पदा-कोयला, लोहा, लकड़ी आदि-की जानकारी छात्रों को दें। इसी सम्पदा का सही उपयोग करते हुए भिलाई स्टील प्लाट बनाया गया है। ऐसा ही उदयोग-केंद्र कोरबा में स्थापित किया गया है। कोरबा के उदयोगों की संक्षिप्त जानकारी दें। बच्चों को छोटे-छोटे समूहों में बोटकर उन्हें एक-एक अनुच्छेद पढ़ने को दें। बाद में उनसे अनुच्छेद का सारांश पूछे। फिर वाचन करायें। और पाठ का साराश बताएँ।


मनुष्य हो या मशीन, सभी को कार्य करने के लिए ऊर्जा अर्थात बल की आवश्यकता होती है। मनुष्य या अन्य जीव-जंतु भोजन से ऊर्जा प्राप्त करते हैं। मशीनों को चलाने के लिए ऊर्जा के कई स्रोतों का उपयोग किया जाता है। खनिज तेल पेट्रोलियम का शोधन करके पेट्रोल डीजल आदि बनाया जाता है, जिससे रेलगाडियों एवं मोटरगाड़ी चलाई जाती हैं। खदानों से प्राप्त होनेवाले पत्थर के कोयले से बड़े-बड़े कल-कारखाने चलाए जाते हैं। आजकल इस
कोयले का सबसे अधिक उपयोग विद्युत (बिजली) पैदा करने में किया जाता है, जहाँ कोयले को जलाकर इसकी ताप-शक्ति से बिजली पैदा की जाती है।

बिजली आज मनुष्य की अनिवार्य आवश्यकता बन गई है। हमारे रसोईघर की चटनी पीसने की मशीन से लेकर बड़ी-बड़ी रेलगाड़ियों और कारखाने तक आज बिजली की ऊर्जा से ही चल रहे है। एक घंटे के लिए भी बिजली बंद हो जाने पर लोग परेशान हो उठते हैं। आज किसी भी देश राज्य, शहर या गौच को विकसित एवं खुशहाल होने का आधार बिजली के मिलने पर ही निर्भर करता है।


हमारा छत्तीसगढ़ वर्तमान में मिलनेवाली बिजली के आधार पर एक खुशहाल राज्य है। हमारे राज्य की खुशहाली का प्रमुख आधार है हमारा औद्योगिक तीर्थ ‘कोरबा । कोरबा को छत्तीसगढ़ की ऊर्जा नगरी भी कहते हैं।


छत्तीसगढ़ के उत्तर पूर्व में वन एवं वनवासियों से भरा-पूरा जिला है- कोरबा। इस जिले का मुख्यालय है-कोरबा नगर। कोरबा एक विशाल औद्योगिक नगर है। इस नगर में बिजली बनाने का बहुत बड़ा विद्युतगृह (पावरहाउस) है। यह पावरहाउस देश में सबसे बड़ा है। इसे भारत सरकार के राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम द्वारा बनाया गया है।


इसके अतिरिक्त छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल का भी अपना पावर हाउस है। दोनों पावर हाउसों में बिजली पैदा करने के लिए कोयले का उपयोग किया जाता है। इनमें कोयले को जलाकर उसके ताप से पानी की भाप बनाई जाती है। भाप से मशीनें चलाकर बिजली बनाई जाती है। इसलिए इन्हें तापविद्युत गृह कहते हैं।

पावरहाउस में बिजली पैदा करने के लिए बहुत ज्यादा खनिज कोयले की आवश्यकता होती है। कोयला भी अच्छी किस्म का होना चाहिए। कोरबा एवं इसके आसपास के क्षेत्र में अच्छे कोयले का पर्याप्त भंडार भूमि के अंदर है। भूमि के अंदर से कोयला निकालने का काम करनेवाली कई कोयला खदानें हैं। इनमें कोरबा, कुसमुंडा. गेवरा, दीपिका, बाँकीमोगरा आदि प्रमुख परियोजनाएँ हैं। इन खदानों से भारी मात्रा में कोयला निकाला जाता है। यहाँ से निकाला गया कोयला, मालगाड़ियों एवं ट्रकों से देश के दूसरे भागों में भी भेजा जाता है।
पावरहाउस में कोयले के साथ ही पानी की भी बहुत जरूरत होती है। पानी की कमी न हो, इसके लिए कोरबा-दरी में हसदो नदी पर एक बाँध बनाया गया है, जिसे दरी बाँध के नाम से जाना जाता है। इसके अतिरिक्त कोरबा से कुछ ही दूरी पर हसदो नदी पर एक और विशाल बाँध बनाया गया है, जिसे मिनी माता (बाँगो) बाँध कहा जाता है। दरी बाँध में पानी कम होने पर बाँगो बाँध से पानी दिया जाता है। बाँगो बाँध में जल-विद्युत की भी तीन इकाइयाँ हैं।


प्रत्येक इकाई में 40 मेगावाट बिजली पैदा होती है। यहाँ पर बाँध के गिरते हुए पानी की ताकत से मशीन चलाकर बिजली पैदा की जाती है।
कोरबा में एल्यूमिनियम धातु बनाने का भी एक बड़ा कारखाना है। इस कारखाने में बॉक्साइट नामक खनिज का शोधनकर एल्यूमिनियम बनाया जाता है। एल्यूमिनियम से कई तरह के बर्तन, फर्नीचर, बिजली के तार आदि बनाए जाते हैं।
कोरबा में इनके अलावा भी छोटे-छोटे कई कल-कारखाने हैं, जो इन बड़े
कारखानों की जरूरतों को पूरा करते हैं। यहाँ की खदानों एवं कारखानों के कारण सामान ढोने अर्थात् ट्रांसपोर्ट का भी काम बहुत ज्यादा है।
इन उद्योगों में बहुत बड़ी संख्या में कामगार काम करते हैं। इस कारण कोरबा
का नगरीय क्षेत्र भी बहुत बड़ा हो गया है। सभी की जरूरतों को पूरा करने के लिए व्यापार भी काफी बढ़ा है। काम एवं व्यापार के लिए प्रायः देश के सभी क्षेत्रों के लोग यहाँ निवास करते हैं और आते-जाते रहते हैं।
कोरबा के ताप विदयुतगृह के कारण ही छत्तीसगढ़ में सभी को आवश्यकता के
अनुसार बिजली मिल रही है। यही हमारी खुशहाली का कारण है। कोरबा के ताप विद्युत गृह से कई अन्य प्रदेशों को भी बिजली की पूर्ति की जाने की संभावना है।
अपनी इन्हीं विशेषताओं के कारण कोरबा आज एक औद्योगिक तीर्थ बन गया है।
हमें आज बिजली पर्याप्त मिल रही है, किंतु इतना ध्यान रखें कि बिजली का
दुरुपयोग न हो। जब आवश्यक न हो बिजली के बल्ब, पंखे, अन्य साधनों को बंद कर रखें। दिन में कमरे की खिड़कियाँ खोलकर रखें ताकि कमरे में रोशनी रहे और बिजली की बचत की जा सके।

शब्दार्थ


अनिवार्य – आवश्यक रूप से
अतिरिक्त अलावा
वनवासी- वन में रहनेवाले
दुरुपयोग- गलत उपयोग
कामगार- काम करनेवाले, श्रमिक

प्रश्न और अभ्यास


प्रश्न 1. कोरबा नगर कहाँ स्थित है? और क्यों प्रसिध्द है?
प्रश्न 2. हमें किन वस्तुओं से ऊर्जा मिलती है?
प्रश्न 3 किस पदार्थ का शोधन करके पेट्रोल-डीजल बनाया जाता है?
प्रश्न 4. हमारे प्रदेश में जल-विद्युत किस बोध से पैदा की जाती है?
प्रश्न 5. कोरबा में सामान ढोने का काम बहुत ज्यादा क्यों है?
प्रश्न 6. हम अपने घरों में बिजली की बचत कैसे कर सकते हैं?
प्रश्न 7. जब तुम्हारे घर की बिजली बंद हो जाती है तो तब तुम्हें क्या-क्या परेशानियों होती है?
प्रश्न 8. नीचे लिखे शब्दों से तुम क्या समझते हो? पाठ को पढ़ो और चर्चा करके लिखो
ऊर्जा, सोत. पेट्रोलियम विद्युतगृह, ताप-विद्युत, जल-विद्युत।

भाषातत्व और व्याकरण


प्रश्न 1 नीचे दिए गए शब्दों के अर्थ जानकर इनका वाक्यो में प्रयोग करो।
सोत, शोधन, अनिवार्य, खुशहाली, अतिरिक्त, पर्याप्त।

समझो

कमल भिलाई गया है। मनोज भिलाई से आया है। इन दोनों वाक्यों को मिलाकर
एक वाक्य इस तरह बना सकते हैं-कमल भिलाई गया है और मनोज भिलाई से आया है। दोनों वाक्यों को जोड़ने के लिए और शब्द का प्रयोग किया गया है। “कमल भिलाई गया है। “सरल वाक्य है। ” कमल भिलाई गया है और मनोज भिलाई से आया है. संयुक्त वाक्य है।


प्रश्न 2 नीचे दिए गए वाक्यों को इसी तरह जोड़कर नये वाक्य बनाओ।
क. सुशील खेल रहा है। रमेश पढ़ रहा है।
ख सीमा हँसती है। रचना चिढ़ती है।
वत्सल पढ़ने जाएगा। नमन मंदिर जाएगा।
उषा सो रही है। श्वेता उसके पास बैठी है।

नीचे दिए गए वाक्यों को पढ़ो।


क. हमें पहले बिजली कम मिलती थी।
ख. हमें आज बिजली पर्याप्त मिलती है।

कक्षा चौथी विषय हिन्दी पाठ 6 औद्योगिक तीर्थ कोरबा