तत्वों का आवर्ती वर्गीकरण कक्षा 10वीं पाठ 4

तत्वों का आवर्ती वर्गीकरण:त्रिक (Doereiner’s Triads) नियम ,न्यूलैंड का अष्टक सिद्धांत (Newland’s Law of Octaves) ,मेंडलीफ की आवर्त सारणी (Mendeleev’s Periodic Table)
आवर्त सारणी की विशेषताएँ

तत्वों का आवर्ती वर्गीकरण कक्षा 10वीं पाठ 4

तत्वों का आवर्ती वर्गीकरण अध्याय में आये मुख्य बिंदु :

डॉबेराइनर के त्रिक (Doereiner’s Triads) नियम क्या है ?

वुल्फगांग डॉबेराइनर ने बताया कि त्रिक के तीनों तत्वों को उनके परमाणु द्रव्यमान (Atomic mass) के आरोही क्रम (increasing order) में रखने पर बीच वाले तत्व का परमाणु द्रव्यमान (Atomic mass), अन्य दो तत्वों के परमाणु द्रव्यमान (Atomic mass) का लगभग औसत होता है।
यथा: लीथियम (Li), सोडियम (Na) तथा पोटैशियम (K), जिनका परमाणु भार (Atomic mass) क्रमश: 7.0, 23.0, तथा 39.0 है। इनमें बीच वाले तत्व सोडियम (Na) का परमाणु भार (Atomic mass) अन्य दो तत्वों लीथियम (Li) तथा पोटैशियम (K) के परमाणु द्रव्यमान (Atomic mass) का औसत है।

न्यूलैंड का अष्टक सिद्धांत (Newland’s Law of Octaves) क्या है ?

ज़ॉन न्यूलैंड, जो कि एक अंगरेज वैज्ञानिक थे, ने उस समय तक ज्ञात तत्वों को उनके परमाणु द्रव्यमान के बढ़ते क्रम (आरोही क्रम) में वर्गीकृत किया। न्यूलैंड के समय ज्ञात तत्वों की संख्यां 56 थी। उन्होंने वर्गीकरण में सबसे कम परमाणु द्रव्यमान वाले तत्व हाइड्रोजन से शुरू कर वर्गीकरण को थोरियम पर समाप्त किया।
उन्होंने पाया कि प्रत्येक आठवें तत्व का गुणधर्म पहले तत्व के समान है। उन्होंने इस वर्गीकरण की तुलना संगीत के अष्टक से की तथा इसका नाम “अष्टक का सिद्धांत (‘Law of Octaves’)” रखा। न्यूलैंड के वर्गीकरण को “न्यूलैंड का अष्टक सिद्धांत (Newlands’ Law of Octaves)” के नाम से जाना जाता है।

मेंडलीफ की आवर्त सारणी (Mendeleev’s Periodic Table) क्या है ?

डमित्री इवानोविच मेन्डेलीफ (Dmitri Ivanovich Medeleev) एक रसियन वैज्ञानिक थे। तत्वों के वर्गीकरण में मेन्डेलीफ का प्रमुख योगदान रहा। मेन्डेलीफ ने ही तत्वों को उनके गुणधर्म के आधार प्रथम बार सफलतापूर्वक वर्गीकृत किया। तत्वों का मेन्डेलीफ के द्वारा वर्गीकरण को मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी (Mendeleev’s Periodic Table) ” कहा जाता है।
मेन्डेलीफ ने हाइड्रोजन (H) से शुरू कर तत्वों को उनके परमाणु द्रव्यमान के बढ़ते क्रम (आरोही क्रम) में एक टेबुल में व्यवस्थित किया। मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी न्यूलैंड के आवर्त सारणी से मिलती थी।

आवर्तिता किसे कहते है ?

यदि आवर्त सारणी में ऊपर से नीचे या बाए से दाए की तरफ जाये , तो तत्वों के भोतिक तथा रासायनिक गुणों में एक निश्चित क्रम दिखाई देता है . तत्वों के गुणों में ये परिवर्तन उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के कारण होता है . तत्वों के गुणों में इस क्रमिक परिवर्तन को ही आवर्तिता कहते है.

आवर्ती फलन क्या है ?

तत्वों के गुणधर्म उनकी परमाणु संख्याओं के आवर्ती फलन हैं। अर्थात् यदि तत्वों को उनकी परमाणु संख्याओं के अनुसार रखा जाय तो समान गुणधर्मवाले तत्व नियमित अंतर के बाद पड़ते हैं।

परमाणु क्या है ?

हर परमाणु नाभिक से बना है और नाभिक एक या एक से अधिक इलेक्ट्रॉन्स से सीमित है। नाभिक आम तौर पर एक या एक से अधिक न्यूट्रॉन और प्रोटॉन की एक समान संख्या से बना है। प्रोटान और न्यूट्रान न्यूक्लिऑन कहलाता है। परमाणु के द्रव्यमान का 99.94% से अधिक भाग नाभिक में होता है। प्रोटॉन पर सकारात्मक विद्युत आवेश होता है, इलेक्ट्रॉन्स पर नकारात्मक विद्युत आवेश होता है और न्यूट्रान पर कोई भी विद्युत आवेश नहीं होता है।

आयनन विभव किसे कहते है ?

इलेक्ट्रान को परमाणु से अलग करने के लिए आवश्यक आयनन ऊर्जा आयनन विभव या आयनन एंथैल्पी कहलाती है

इलेक्ट्रान बंधुता किसे कहते हैं ?

यह ऊर्जा परिवर्तन है जब उदासीन गैसीय परमाणु से एक इलेक्ट्रॉन प्राप्त करके यह ऋणावेशित आयन में परिवर्तित हो जाता हैं। यह अन्य इलेक्ट्ररॉन को जोड़ने के लिए गैसीय परमाणु के आकर्षण या बन्धुता का मापन होती है।

विद्युत्-ऋणात्मकता क्या है ?

विद्युत्-ऋणात्मकता (Electronegativity) किसी परमाणु का एक रासायनिक गुण है जो दर्शाता है कि वह परणाणु किसी सहसंयोजी आबंध में एलेक्ट्रॉनों को आकर्षित करने में कितना सक्षम है।

तत्वों का आवर्ती वर्गीकरण अध्याय का वीडियो :

कक्षा 10वीं पाठ 4 तत्वों का आवर्ती वर्गीकरण

आवर्त सारणी की विशेषताएँ

  1. आवर्त सारणी के किसी अवधि में बाएँ से दाएँ जाने पर तत्त्व का धातुई गुण कम होता जाता है तथा अधातुई गुण में वृद्धि होती है।
  2. आवर्त सारणी के किसी अवधि में बाएँ से दाएँ जाने पर तत्त्व की रासायनिक क्रियाशीलता घटती है और बाद में बढ़ती है।
  3. किसी अवधि में तत्त्वों की संयोजकता 1 से बढ़कर 4 हो जाती है, तथा उसके बाद घटते-घटते शून्य हो जाती है।
  4. किसी अवधि में बाएँ से दाएँ जाने पर संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या 1 से बढ़कर 8 हो जाती है।
  5. आवर्त सारणी के किसी अवधि में इलेक्ट्रॉन-प्रीति का मान बाएँ से दाएँ जाने पर प्रायः बढ़ता है।
  6. आवर्त सारणी के किसी अवधि में बाएँ से दाएँ जाने पर विद्युत् ऋणात्मकता का मान क्रमशः बढ़ता जाता है।
  7. आवर्त सारणी के किसी अवधि में बाएँ से दाएँ जाने पर पर आयनन विभव का मान बढ़ता है।
  8. आवर्त सारणी के किसी अवधि में बाएँ से दाएँ जाने पर परमाणु आकार या परमाणु की त्रिज्या घटता है।
  9. आवर्त सारणी के किसी अवधि में बाएँ से दाएँ जाने पर तत्त्व के ऑक्साइडों के भास्मिक गुण क्रमशः घटते जाते हैं।

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