पोस्ट में पूछे जाने वाले सवालों का उत्तर और पाठ या अध्याय को पढ़ने या वीडियो देखने के बाद आपने जो भी सीखा ? उसे आप हमें COMMENT BOX में लिख कर भेज सकते हैं ताकि अन्य विद्यार्थी भी लाभान्वित हो सके.

यक्ष-युधिष्ठिर-संवादः पञ्चमः पाठः कक्षा 10 संस्कृत

0

यक्ष-युधिष्ठिर-संवादः पञ्चमः पाठः कक्षा 10 संस्कृत


प्रस्तुत अवतरण महाभारत’ से लिया गया है जिसके रचयिता महर्षि वेदव्यास जी हैं महाभारत एक लाख श्लोकों में निबद्ध है। अतः इसे “शत-साहस्री-संहिता” भी कहते है। एक बार अज्ञात वास के समय घूमते हुए पाण्डवों को प्यास लगी। तब नकुल जल का तलाश करते हुए एक जलाशय के पास पहुँचे किन्तु यक्ष ने पानी पीने से मना कर दिया। उन्होंने कहा-मेरे प्रश्नों के उत्तर देने के पश्चात ही पानी पी सकते हैं। पिपासाकुल नकुल एवं अन्य भाई बिना उत्तर दिये पानी पीये और मृत्यु को प्राप्त हुए। युधिष्ठिर ने धैर्यपूर्वक यक्ष के प्रश्न का उत्तर दिया। प्रस्तुतांश में यक्ष के प्रश्न और उत्तर युधिष्ठिर के हैं। सभी प्रश्नोतर लोकोपयोगी है।


1-
केनस्विच्छ्रोत्रियो भवति केनस्विविन्दते महत्।
केनाद्वितीयवान्भवति राजन् केन च बुद्धिमान्।।


2.
श्रुतेन श्रोत्रियो भवति तपसा विन्दते महत्।
धृत्या द्वितीयवान्भवति राजन् बुद्धिमान्वृद्धसेवया।।


3.

किंस्विद् गुरुतरं भूमेः किंस्विदुच्चतरं च खात्।
किस्विच्छीघ्रतरं वायोः किंस्विद् बहुतरं तृणात्।।


4
मातागुरुतराभूमेः खादप्युच्चतरः पिता।
मनः शीघ्रतरं वाताच्चिन्ता बहुतरी तृणात्।।


5.
धान्यानामुतमं किंस्विद्धनानां स्यात्किमुत्तमम्।
लाभानामुतमं किं स्यात्सुखानां स्यात्किमुत्तमम्।।


6.
धान्यानामुत्तमं दाक्ष्यं धनानामुतमं श्रुतम्।
लाभानामुतम श्रेयः सुखानां तुष्टिरुतमा।।


7.
केनस्विदावृत्तो लोकः केनस्विन्न प्रकाशते।
केन त्यजति मित्राणि केन स्वर्ग न गच्छति।।


8.
अज्ञानेनावृत्तो लोकस्तमसा न प्रकाशते।
लोभात त्यजति मित्राणि सङ्गात्स्वर्ग न गच्छति।।


9.
तपः किं लक्षणं प्रोक्तं को दमश्च प्रकीर्तितः।
क्षमा च का परा प्रोक्ता का च ही परिकीर्तिता।।


10.
तपः स्वधर्मवर्तित्वं मनसो दमनं दमः।
क्षमा द्वन्द्वसहिष्णुत्वं हीरकार्यनिवर्तनम्।।

Leave A Reply

Your email address will not be published.